रिश्वत के बदले अस्मत मांगने का मामला : 24 घंटे में वर्दी उतरी, अब सजा का इंतजार

जयपुर कमिश्नरेट में महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए बनी यूनिट के प्रभारी ने ही महिला से रिश्वत से बदले अस्मत मांग ली। एक पीड़िता जिसने जुलाई में एफआईआर करवाई, एसीपी कैलाश बोहरा पांच माह तक पीड़िता से रिश्वत लेता रहा। संवेदनहीनता की हद देखिए पीड़िता की सैलरी 16 हजार रुपए महीना थी और वह हर माह 10 हजार रुपए रिश्वत दे रही थी।

रिश्वत के बदले अस्मत मांगने का मामला : 24 घंटे में वर्दी उतरी, अब सजा का इंतजार

जयपुर। रिश्वत के बदले अस्मत मांगने वाले एसीपी कैलाश बोहरा को राज्य सरकार ने पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया है। राज्य के गृह विभाग ग्रुप-1 ने बोहरा को निलंबित करने के आदेश जारी किए हैं। निलंबन काल के दौरान उनका मुख्यालय जोधपुर कमिश्नरेट रखा गया है।

संयुक्त शासन सचिव पुलिस रामनिवास मेहता के हस्ताक्षर से जारी आदेश के अनुसार कैलाश चंद बोहरा का निलंबन के दौरान कार्यकाल मुख्यालय कार्यालय पुलिस आयुक्त, आयुक्तालय जोधपुर के कार्यालय में रखा गया है। मतलब यह है कि जेल से बाहर आने के बाद सहायक पुलिस आयुक्त कैलाश बोहरा निलंबन अवधि में वह जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट कार्यालय में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कैलाश चंद बोहरा सहायक पुलिस आयुक्त महिला अत्याचार अनुसंधान यूनिट, जयपुर शहर पूर्व पुलिस आयुक्तालय जयपुर के विरुद्ध विभागीय जांच अपराधिक प्रकरण भी लंबित है।

विधानसभा सभा में उठी थी मांग :

जयपुर कमिश्नरेट में महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए बनी यूनिट के प्रभारी ने ही महिला से रिश्वत से बदले अस्मत मांग ली। एक पीड़िता जिसने जुलाई में एफआईआर करवाई, एसीपी कैलाश बोहरा पांच माह तक पीड़िता से रिश्वत लेता रहा। संवेदनहीनता की हद देखिए पीड़िता की सैलरी 16 हजार रुपए महीना थी और वह हर माह 10 हजार रुपए रिश्वत दे रही थी।

वहीं सोमवार को संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विधानसभा में रिश्वत के बदले अस्मत मांगने वाले सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) कैलाश बोहरा को पुलिस सेवा से बर्खास्त किए जाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि कैलाश बोहरा का प्रकरण रेयरेस्ट रेयर मामला है। धारीवाल ने बताया कि किसी को बर्खास्त करने से पहले प्रक्रिया अपनानी होती है। पहले उसे नोटिस दिया जाता है, लेकिन संविधान का अनुच्छेद-311 कहता है कि अगर कोई गंभीर मामला है तो उस प्रक्रिया को परे रखकर सीधे बर्खास्त किया जा सकता है।

ऑफिस खुलने से पहले ही गृह विभाग ने जारी किए आदेश :

इससे पहले मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग के संयुक्त शासन सचिव रामनिवास मेहता ने सोमवार सुबह ऑफिस खुलने के पहले ही निलंबन आदेश जारी किए थे। राजस्थान में पहली बार 24 घंटे में दागी अफसर को सेवा से बर्खास्त करने का फैसला किया गया है। गौरतलब है कि सहायक पुलिस आयुक्त कैलाश बोहरा को रविवार दोपहर बाद एसीबी ने रिश्वत के बदले अस्मत मांगते हुए रंगे हाथ पकड़ा था।